Sunday, 22 October 2017

क्या देश की अर्थवयस्था के लिए जीसटी की दरो में बदलाव की जरुरत है

रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अधिया ने कहा, देश में  GST दरों में बड़े बदलाव की बहुत  जरूरत





रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अधिया ने जीएसटी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि छोटे और मध्यम वर्ग के कारोबारियों पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए यह जरूरी है कि जीएसटी की दरों की फिर से मरम्मत की जाए। उन्होंने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि करीब दर्जन भर टैक्सों को अपने अंदर समाहित कर लेने वाले जीएसटी को स्थिर होने में अभी करीब साल भर का समय लग जाएगा। उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम वर्ग के कारोबारियों के कारोबार को आसान बनाने के लिए ही जीएसटी काउंसिल ने कई चीजों को लेकर टैक्स की दरों में बदलाव किया है। जीएसटी काउंसिल ने कई बैठकों के बाद यह पाया है कि कुछ मामलों पर जीएसटी के दिक्कतें हो रही हैं, जिन्हें सुधारने की कोशिश की गई है।






राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि नए माल और सेवा कर (जीएसटी) लागू किए जाने के बाद अब लघु और मझौले उद्योगों के बोझ को कम करने के लिए कर दरों में पूरी तरह बदलाव करने की जरूरत है। भाषा को दिए साक्षात्कार में राजस्व सचिव ने कहा कि जीएसटी प्रणाली को स्ठिर होने में करीब एक साल लगेगा। जीएसटी में एक दर्जन से अधिक केंद्रीय और राज्य लेवी जैसे उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट समाहित कर दिए गए हैं। जीएसटी लागू हुए करीब चार महीने हो गए हैं। इस नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली से कुछ प्रारंभिक परेशानियां और अनुपालन से जुड़े मुद्दे उभरे हैं। जीएसटी परिषद ने कई मुद्दो का समाधान निकाला भी है। परिषद इन प्रणाली में सर्वोच्च निर्णायक निकाय है।

अधिया ने कहा, 'जीएसटी में टैक्स रेट्स में बड़े सुधार की जरूरत है। ऐसा भी संभव है कि एक चैप्टर में दिए गए गुड्स अलग-अलग टैक्स रेट में आ गए हों। हमें चैप्टर के हिसाब से वस्तुओं पर नजर डालनी चाहिए और यह देखा जाना चाहिए कि छोटे और मझोले कारोबारियों पर बोझ ज्यादा न हो। अगर ऐसा पाया जाता है कि इन पर और आम आदमी पर टैक्स का बोझ है तो उसे कम किया जाना चाहिए। इससे जीएसटी की स्वीकार्यता बढ़ेगी।' 

जीएसटी काउंसिल की 23वीं मीटिंग वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में 10 नवंबर को गुवाहाटी में होने जा रही  है। अधिया ने कहा कि हम जितनी जल्दी हो सके इसे करने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि फिटमेंट कमिटी इस पर काम करने के लिए कितना समय लेती है।

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